रोज़ के कामों के लिए आठ Android ऐप: आर्काइव से AI तक

ZIP खोलना, फ़ाइल भेजना, क्लाउड बैकअप, VPN, ब्राउज़िंग, रास्ता ढूँढना, AI से मदद और छिपी सेटिंग: आठ Android ऐप, हर एक का अपना काम।

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फ़ोन के साथ आए ऐप रोज़ के हर काम के लिए काफ़ी नहीं होते। किसी ग्रुप से RAR फ़ाइल आती है, नए फ़ोन में पूरी गैलरी ले जानी होती है, या कैफ़े के खुले Wi-Fi पर कुछ ज़रूरी खोलना होता है। यहाँ आठ ऐप हैं, और हर एक ऐसी ही किसी असली परेशानी को हल करता है।

सबको सबकी ज़रूरत नहीं होगी। इसलिए हर ऐप के साथ लिखा है कि वह कौन-सा काम करता है, कितनी जगह लेता है, क्या मुफ़्त है और किसने बनाया है। कुछ Google, Xiaomi और OpenAI जैसी बड़ी कंपनियों के हैं, कुछ छोटे डेवलपर के। सीमाएँ भी साथ हैं, ताकि आप सिर्फ़ वही इंस्टॉल करें जिसकी सच में ज़रूरत हो।

कौन-सा काम, कौन-सा ऐप

  • ZArchiver — ZIP, RAR और 7z फ़ाइलें खोलना
  • ShareMe — बिना डेटा के फ़ोन से फ़ोन फ़ाइल भेजना
  • TeraBox — फ़ोटो और फ़ाइलों के लिए बड़ा क्लाउड
  • Proton VPN — मुफ़्त प्लान वाला प्राइवेसी VPN
  • Google Chrome — Google अकाउंट से सिंक होने वाली ब्राउज़िंग
  • Google Maps — रास्ता, बस-मेट्रो और आसपास की जगहें
  • ChatGPT — जल्दी जवाब, लिखने में मदद और नए आइडिया
  • Activity Launcher — छिपी सेटिंग और ऐप की अंदरूनी स्क्रीन

ZArchiver

रोज़ के कामों के लिए आठ Android ऐप: आर्काइव से AI तक

ZIP, RAR और 7z फ़ाइलें खोलना

टेलीग्राम ग्रुप से आई नोट्स की ZIP हो, दफ़्तर का RAR आर्काइव या कई हिस्सों में बँटा बैकअप, ZArchiver इन्हें फ़ोन पर खोल देता है। यह नए आर्काइव भी बनाता है, जो ढेर सारी फ़ाइलें एक साथ भेजते समय काम आता है। खुलते ही फ़ोल्डरों की सूची और ऊपर पूरा पाथ दिखता है, तो पता रहता है कि फ़ाइल कहाँ खुलेगी।

इंटरफ़ेस सादा है, चमक-दमक नहीं। Play पर दर्ज वर्ज़न 1.0.10 का अपडेट 24 जून 2024 का है, यानी बदलाव कम आते हैं। उस अपडेट में तेज़ फ़ाइल ऑपरेशन, E-Ink थीम और ड्रैग करने की सुविधा आई थी। ऐप फ़ाइलें कहीं भेजता नहीं, सिर्फ़ फ़ोन में मौजूद फ़ाइलों पर काम करता है। अनजान स्रोत के आर्काइव में अनचाहे ऐप छिपे हो सकते हैं, तो उन्हें खोलते समय सावधान रहें।

जिन्हें अक्सर पढ़ाई या दफ़्तर की आर्काइव फ़ाइलें मिलती हैं, उनके लिए यह रखने लायक है। पासवर्ड वाली और कई हिस्सों वाली फ़ाइलें भी यह संभाल लेता है, और इंटरनेट की अनुमति के बिना काम करता है। ZDevs के इस ऐप के Google Play पर 10 करोड़ से ज़्यादा इंस्टॉल हैं। ZArchiver →

ShareMe

ShareMe

बिना डेटा के फ़ोन से फ़ोन फ़ाइल भेजना

पुराने फ़ोन से नए फ़ोन में पूरी गैलरी ले जानी हो या दोस्त को शादी का लंबा वीडियो देना हो, ShareMe दोनों फ़ोन के बीच सीधे वायरलेस कनेक्शन से फ़ाइल भेजता है। फ़ोटो, वीडियो, म्यूज़िक, डॉक्यूमेंट और APK, सब जाते हैं, और मोबाइल डेटा खर्च नहीं होता। कुछ भी क्लाउड पर अपलोड नहीं होता।

सीमा यह है कि दोनों फ़ोन में ऐप होना चाहिए और दोनों पास-पास होने चाहिए, यानी दूर बैठे व्यक्ति को फ़ाइल भेजने का यह तरीका नहीं है। पास के फ़ोन ढूँढने के लिए ऐप स्टोरेज और लोकेशन जैसी अनुमतियाँ माँगता है, जो इस तरह के ऐप में आम है। 10 सितंबर 2026 के वर्ज़न 3.48.05 को Android 7.0 या नया सिस्टम चाहिए, और डाउनलोड करीब 27.66 MB का है।

नया फ़ोन लेने वालों और बड़े वीडियो बाँटने वाले परिवारों के लिए यह काम का है। ऐप Xiaomi का है, पर दूसरे ब्रांड के Android फ़ोन पर भी चलता है और मुफ़्त है। ट्रांसफ़र बीच में टूट जाए तो फ़ाइल अधूरी रह सकती है, इसलिए भेजने के बाद बड़ी फ़ाइल एक बार खोलकर देख लें। ShareMe →

TeraBox

TeraBox

फ़ोटो और फ़ाइलों के लिए बड़ा क्लाउड

TeraBox, Flextech Inc. का क्लाउड स्टोरेज ऐप है, जो पंजीकरण पर 1024 GB यानी करीब 1 TB जगह मुफ़्त देता है। फ़ोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट यहाँ रखे जा सकते हैं, डिवाइसों में सिंक होते हैं और शेयर लिंक बनते हैं। हर फ़ाइल की सीमा 128 GB है। फ़ोन खो जाए, तब भी फ़ाइलें सर्वर पर बची रहती हैं।

कुछ समझौते भी हैं। मुफ़्त यूज़र को विज्ञापन दिखते हैं और कुछ सुविधाएँ सीमित रहती हैं, जिन्हें पेड प्लान खोलता है। ऐप खुद करीब 249 MB का है, इसलिए कम जगह वाले फ़ोन में पहले थोड़ी सफ़ाई करनी पड़ सकती है। Dropbox और OneDrive से फ़ाइलें सीधे लाने की सुविधा और इंकॉग्निटो प्लेबैक मोड 22 सितंबर 2026 के वर्ज़न 4.26.0 में जुड़े हैं।

जिनके फ़ोन की मेमोरी बार-बार भर जाती है, उन्हें इससे राहत मिल सकती है। पर किसी भी क्लाउड की तरह सोचें कि क्या अपलोड कर रहे हैं, प्राइवेसी सेटिंग देखें और ज़रूरी फ़ाइलों का दूसरा बैकअप कहीं और भी रखें। ऐप Android 6.0 या नए सिस्टम पर चलता है। TeraBox →

Proton VPN

Proton VPN

मुफ़्त प्लान वाला प्राइवेसी VPN

Proton VPN इस सूची का अकेला ऐप है जो इंटरनेट कनेक्शन की सुरक्षा पर केंद्रित है। यह फ़ोन का ट्रैफ़िक एन्क्रिप्टेड टनल से चुने हुए सर्वर तक ले जाता है, इसलिए वेबसाइटों को आपका नहीं, सर्वर का पता दिखता है। रेलवे स्टेशन, कैफ़े या हॉस्टल के खुले Wi-Fi पर यह काम आता है। मुफ़्त प्लान बिना साइन-अप और बिना डेटा सीमा के चलता है।

मुफ़्त प्लान में सर्वर चुनने की आज़ादी सीमित है, जबकि पेड Plus प्लान ज़्यादा लोकेशन और फ़ीचर जोड़ता है। किल स्विच और स्प्लिट टनलिंग जैसे विकल्प भी हैं। याद रखें कि VPN आपको गुमनाम नहीं बनाता, और जिन अकाउंट में आप लॉगिन हैं, वे आपको पहचानते रहते हैं। इस VPN के लिए अब Android 8.0 या नया सिस्टम ज़रूरी है, यह भारत के Google Play पर लिखा है।

जो लोग अक्सर सार्वजनिक Wi-Fi पर रहते हैं, उनके लिए यह पहला VPN बन सकता है। स्विस कंपनी Proton AG के ऐप ओपन सोर्स हैं और उनकी स्वतंत्र जाँच हो चुकी है, जो इसकी नो-लॉग नीति को सहारा देती है। इंस्टॉल करीब 24.8 MB का है और रूट की ज़रूरत नहीं पड़ती। Proton VPN →

Google Chrome

Google Chrome

Google अकाउंट से सिंक होने वाली ब्राउज़िंग

ज़्यादातर Android फ़ोन में Chrome पहले से होता है, इसलिए सवाल इंस्टॉल करने का कम, सही सेटअप का ज़्यादा है। इसकी मुख्य ताकत Google अकाउंट के साथ बुकमार्क, पासवर्ड, हिस्ट्री और खुले टैब का सिंक है, जिससे फ़ोन और कंप्यूटर के बीच आना-जाना आसान रहता है। Google Lens, Google Translate और Google Password Manager भी इससे जुड़े हैं।

सीमा प्राइवेसी की है, क्योंकि Chrome Google सेवाओं और आपके अकाउंट से गहराई से बँधा है। Proton VPN की तरह यह पूरा कनेक्शन एन्क्रिप्ट नहीं करता, बल्कि वेबसाइटों के HTTPS पर निर्भर रहता है। अपडेट नोट छोटे होते हैं, जैसे 23 सितंबर 2026 का, जिसमें हैंग और क्रैश ठीक हुए, पर इनके पीछे सुरक्षा सुधार भी होते हैं। इसलिए ऑटो-अपडेट चालू रखें।

जो पहले से अपना सब कुछ Google अकाउंट पर रखते हैं, उन्हें ब्राउज़र बदलने की ज़रूरत नहीं, बस कुछ सेटिंग ठीक करनी हैं। Enhanced Protection चालू करें, Safety Check चलाएँ, साइटों की अनुमतियाँ देखें और समय-समय पर कैश व ब्राउज़िंग डेटा साफ़ करें। Google Chrome →

Google Maps

Google Maps

रास्ता, बस-मेट्रो और आसपास की जगहें

Google Maps नेविगेशन शुरू होने से पहले ही काम आने लगता है। इमारत का दरवाज़ा किस तरफ़ है, मेट्रो या बस बदलने में कितना समय लगेगा, पैदल कितना चलना है और दुकान अभी खुली है या नहीं, सब पता चलता है। Play Store विवरण के अनुसार इसमें 25 करोड़ से ज़्यादा कारोबारों और जगहों की जानकारी है।

वर्ज़न और साइज़ डिवाइस के हिसाब से बदलते हैं, और अपडेट अक्सर आते हैं। सेव की हुई जगहें और सफ़र की हिस्ट्री जैसी निजी सुविधाएँ लोकेशन डेटा और अकाउंट पर टिकी हैं। लोकेशन सेटिंग देखकर तय करें कि क्या रखा जाए और कितने समय तक। बस-मेट्रो और दुकानों की जानकारी हर इलाके में एक जैसी पूरी नहीं होती।

जो रोज़ सफ़र करते हैं या नए शहर जाते हैं, उनके लिए यह लगभग ज़रूरी है। यात्रा से पहले इलाका ऑफ़लाइन डाउनलोड कर लें, ताकि कमज़ोर नेटवर्क में भी बुनियादी नेविगेशन चले। सेव लिस्ट में खाने की जगहें या दफ़्तर के पते रखना भी रोज़ का समय बचाता है। Google Maps →

ChatGPT

ChatGPT

जल्दी जवाब, लिखने में मदद और नए आइडिया

ChatGPT, OpenAI का आधिकारिक Android ऐप है। इसमें टेक्स्ट चैट, रियल-टाइम आवाज़, फ़ोटो से सवाल और इमेज बनाना, सब एक जगह है। किसी लेख का सार, मैसेज का मसौदा या यात्रा की योजना माँगिए। लैपटॉप पर शुरू की बातचीत शाम को फ़ोन पर आगे बढ़ सकती है, क्योंकि हिस्ट्री डिवाइसों में सिंक होती है।

जवाब गलत या पुराने हो सकते हैं, इसलिए सेहत, कानून या पैसे जैसी अहम बातें खुद जाँचें। ऐप के लिए पैसे नहीं लगते, पर ज़्यादा क्षमता और फ़ीचर पेड प्लान में ही मिलते हैं। हर फ़ीचर अपनी अलग परमिशन पर चलता है, जैसे माइक्रोफ़ोन या कैमरा, तो सिर्फ़ ज़रूरी अनुमति दें। निजी या गोपनीय जानकारी डालने से बचें और सेटिंग में डेटा कंट्रोल देखें।

छात्र, दफ़्तर में ईमेल लिखने वाले या किसी भी विषय पर पहली समझ चाहने वाले इसे रोज़ इस्तेमाल कर सकते हैं। बिल्ड 1.2026.258 के लिए Android 7.1 या नया सिस्टम चाहिए और ऐप 12+ रेटेड है। मिलते-जुलते नाम वाले कई ऐप भी मौजूद हैं, इसलिए सिर्फ़ OpenAI का आधिकारिक ऐप लें। ChatGPT →

Activity Launcher

Activity Launcher

छिपी सेटिंग और ऐप की अंदरूनी स्क्रीन

कई ऐप्स में कोई सेटिंग चार-पाँच मेनू के पीछे छिपी होती है। Activity Launcher फ़ोन के हर ऐप की वे स्क्रीन और कार्य दिखाता है जिन्हें ऐप खुद Android को बताता है। इन्हें सीधे खोला जा सकता है या उनका होम स्क्रीन शॉर्टकट बनाया जा सकता है। ताले तोड़ना इसका काम नहीं, यह सिर्फ़ उन दरवाज़ों तक ले जाता है जो पहले से मौजूद हैं।

कुछ स्क्रीन सीधे खुलने के लिए बनी नहीं होतीं, इसलिए वे क्रैश हो सकती हैं या कुछ नहीं करतीं। छिपी सिस्टम सेटिंग बदलने के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। ऐप सिर्फ़ 2.25 MB का है और भारत के Play पर Android 7.0 या नया सिस्टम माँगता है। वहाँ इसका नाम ‘एक्टिविटी लॉन्चर’ दिखता है।

यह पावर यूज़र, डेवलपर और फ़ोन की गहराई में झाँकने वालों के लिए है। ऐप में फ़ेवरेट की सूची और Quick Settings टाइल भी है, जिससे बार-बार खुलने वाली स्क्रीन एक टैप पर आ जाती है। वर्ज़न 2.4.1 13 जुलाई 2026 को आया। अगर आपको पहले से पता है कि कौन-सी स्क्रीन चाहिए, तभी इसे इंस्टॉल करें। Activity Launcher →

अपनी ज़रूरत के हिसाब से ऐप कैसे चुनें

शुरुआत उन कामों से करें जो आप सच में करते हैं। आर्काइव फ़ाइलें आती हैं तो ZArchiver, फ़ोन बदलते या बड़े वीडियो बाँटते हैं तो ShareMe, और क्लाउड बैकअप चाहिए तो TeraBox को उस स्टोरेज से मिलाकर देखें जो Google या फ़ोन कंपनी पहले से देती है।

ShareMe और TeraBox साथ भी चल सकते हैं: पास के फ़ोन के लिए एक, दूर के लोगों के लिए दूसरा। Chrome और Google Maps अक्सर पहले से होते हैं, इसलिए उन्हें बदलने से ज़्यादा उनकी सेटिंग मायने रखती है।

फिर अनुमतियाँ और भरोसा देखें। यूटिलिटी ऐप अक्सर फ़ाइल, लोकेशन या नेटवर्क की पहुँच माँगते हैं, इसलिए जाने-पहचाने डेवलपर के ऐप Google Play या आधिकारिक साइट से लें। मुफ़्त वर्ज़न में क्या है, यह पहले समझें, और एक ही काम के लिए कई ऐप न रखें। छोटा और सोचा-समझा सेट अपडेट रखना भी आसान है और सुरक्षित रखना भी।

आर्काइव, मुफ़्त VPN और AI में प्राइवेसी

क्या Android पर अलग आर्काइव ऐप की ज़रूरत है?

कई फ़ोन का फ़ाइल मैनेजर ZIP खोल लेता है, पर RAR और 7z का सपोर्ट हर फ़ोन में एक जैसा नहीं होता। ZArchiver ये फ़ॉर्मेट खोलता है और अपने आर्काइव भी बनाता है।

क्या Proton VPN जैसे मुफ़्त VPN पर भरोसा किया जा सकता है?

यह इस पर निर्भर है कि VPN कौन चलाता है। Proton VPN के ऐप ओपन सोर्स हैं और उनकी स्वतंत्र जाँच हुई है। अनजान मुफ़्त VPN के साथ ज़्यादा सावधानी रखें, क्योंकि वे विज्ञापन या डेटा इकट्ठा करने पर चल सकते हैं।

क्या ChatGPT में निजी जानकारी डालनी चाहिए?

संवेदनशील निजी, पैसों से जुड़ी या दफ़्तर की जानकारी न डालना बेहतर है। डेटा कंट्रोल ऐप की सेटिंग में देखें, और ध्यान रखें कि जवाब गलत भी हो सकता है, तो अहम बात खुद परखें।

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